आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे
इसी असमंजस में हम तो सालों साल बिताएंगे
पानी मुफ्त बांटेंगे बिजली मुफ्त बांटेंगे
बाकी सारे का सारा हम अकेले डकार जाएंगे
आगे हाथ लगाएंगे…….
अरे देखो पल दो पल में यारों ये क्या हो गया
हम टंकी पे चढ़ते रह गये वो बसंती ले गया
जाते-जाते अपना भी पाप हमारे मत्थे मढ़ गया
हम रेज़गारी गिनते रह गये वो खजाना ले गया
जाते जाते हम भी अपने दोनों कान पकड़ते है
अब रोज ना एक ही ये योजना बनाएंगे
आगे हाथ लगाएंगे…..
रार नयी ठानूंगा हार नहीं मानूंगा
अब चाहे कुछ भी हो पर माफी नहीं मागूंगा
आने वाले आएंगे जाने वाले जाएंगे
किस सोच में पड़े हो भैया ये दुनिया तो गोल है
कितनी विद्रूपता है जग में कितनी विडंबना है जग में
इतने पर भी सोचते है हम कल फिर आएंगे
आगे हाथ लगाएंगे……
झूठ सांच हो जाला बार-बार कहला से
सांच झूठ हो जाला बार-बार कहला से
अब कहां कहां हम जाएंगे कहां कहां समझाएंगे
कौन साला कहता है कौन सा लाॅ कहता है
हम भी नजीर बन जाएंगे
आगे हाथ लगाएंगे……..
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