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Thursday, December 18, 2025

आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे

आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे 
आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे
इसी असमंजस में हम तो सालों साल बिताएंगे 
पानी मुफ्त बांटेंगे बिजली मुफ्त बांटेंगे 
बाकी सारे का सारा हम अकेले डकार जाएंगे
आगे हाथ लगाएंगे…….

अरे देखो पल दो पल में यारों ये क्या हो गया
हम टंकी पे चढ़ते रह गये वो बसंती ले गया
जाते-जाते अपना भी पाप हमारे मत्थे मढ़ गया
हम रेज़गारी गिनते रह गये वो खजाना ले गया
जाते जाते हम भी अपने दोनों कान पकड़ते है
अब रोज ना एक ही ये योजना बनाएंगे
आगे हाथ लगाएंगे…..

 रार नयी ठानूंगा हार नहीं मानूंगा 
अब चाहे कुछ भी हो पर माफी नहीं मागूंगा
आने वाले आएंगे जाने वाले जाएंगे 
किस सोच में पड़े हो भैया ये दुनिया तो गोल है
कितनी विद्रूपता है जग में कितनी विडंबना है जग में 
इतने पर भी सोचते है हम कल फिर आएंगे
आगे हाथ लगाएंगे……

झूठ सांच हो जाला बार-बार कहला से
सांच झूठ हो जाला बार-बार कहला से
अब कहां कहां हम जाएंगे कहां कहां समझाएंगे
कौन साला कहता है कौन सा लाॅ कहता है
हम भी नजीर बन जाएंगे
आगे हाथ लगाएंगे……..

टूटा बोतल

टूटा बोतल 

कौन पढ़ेगा किताबे इस भाग दौड़ की दुनिया में 
टूटा बोतल देकर देखो है भेजे स्कूल में 

खाके चाहे पी के ना आओ भिड़ जाओ स्कूल में
टूटा बचपन छूटा जवानी आपाधापी स्कूल में
कहां कहां से घुमा के मंजिल फिर लायी स्कूल में
छूट गया सो पाठ पढ़ाया घुमा-घुमा स्कूल में
टूटा बोतल…

अब ना ढूंढूंगा दुनिया को दुनिया को मुझे ढूंढने दो 
सीकर कपड़ा करु गुजारा राम नाम में डूबने दो
जिसको ढूंढ़ा गली-गली वो अपने ही पास मिली
हेरत हेरत हे सखी पांव पंक में धंसी मिली
टूटा बोतल….

इतना पड़ों ना चक्कर में इस दुनिया के प्यारे
मधुशाला तक को ना पूछा जे प्याला ले के भागे
हर कली के भाग में है फूल ही हो जाना 
महका के इस बगिया को चिर निद्रा सो जाना
टूटा बोतल….

चिट्ठा चढ़ा के भुट्टा खिलाना यहां आता सबको खूब है
ऐसे धीरे से खिसकना देखो कितना खूब है
गिट्टी से ना निकला पर पत्थर से हां निकलेगा
ठोक पीट कर गया तराशा मूरत बनके निकलेगा
टूटा बोतल…..


जीना कितना आसान है

जीना कितना आसान है 

घोड़े बैल कुल्हण अब नुमाइश का सामान है
इस रंग बदलती दुनिया में जीना कितना आसान है 
भूसा वाला बखारी देखो सजावट का सामान है 
इस रंग बदलती दुनिया में जीना कितना आसान है

सौवे निनाबे पढ़ायेंगा कौन इस हैन्ड्रेड वाली दुनिया में 
कैप पहना के भेजा था टोपी पहना के भेजा है
कुछ मिट गया कुछ मिट जाएगा जरूरत का सिद्धांत है
इस रंग बदलती……

जेब काटने वाले पूछें जेब में कुछ है कि नहीं
ऐसे बदल रहीं है दुनिया शर्मों-हया है कि नहीं
कुछ लुट गया कुछ लुट जाएगा हाथ लगाने का विज्ञान है
इस रंग बदलती……….

चार दिन का बखेड़ा है फुटपाथ को जिलाना है
अगले चार दिनों में ही तय इसका मर जाना है
कुछ खप गया कुछ खप जाएगा अतिक्रमण का सिद्धांत है
इस रंग बदलती दुनिया में…….

आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे

आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे  आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे इसी असमंजस में हम तो सालों साल बिताएंगे  पानी मुफ्त बांटेंगे बिजली मुफ्त ...