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Wednesday, March 30, 2022

मुझको अहसास है तुमको आभास है

मुझको अहसास है, तुमको आभास है

तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है

तुमसे मिलने को अब भी तड़पती यहां

दिल के कोनो में अपनी दबी सांस है


हिय के कोनो में है अब भी इक कमरा यहां

जिसके ताको पे रखी है यादें तेरी

खिड़कियों के ही खुलते ही मुखड़ा तेरा

देख मैं भी सजता सवरता रहा

तेरी यादों के पलको के छांव में मैं

स्वयं को ही अक्सर लुटाता रहा


दिल की धड़कन भी प्रायः अनायास है

साथ अधरों की रहती अनबुझी प्यास है

मुझको अहसास है, तुमको आभास  है

तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है


सांकलो के बिना दर खुला है यहां

दर पे दस्तक है देती तेरी हिचकियां

वो यौवन की मदमस्त अंगड़ाइयां

 गम के तकियों तले मेरी सिसकियां

सिसकती यहां है तन्हाईयां

संग खेले है  तेरी परछाईयां


लकरों में अपना लिखा भाग्य है

कोरे कागज तेरे नाम लिखना मेरे भाग्य है

मुझको अहसास है तुमको आभास है

तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है।


दिल के दरिया में बहते रहते हैं पत्ते तेरे नाम के

मैं पल उन्हें चुनता बिनता उलटता पलटता हूं

संग बिताए पलों में रमता धुनता हूं

अश्कों के कोरों से गीत गजले रचता हूं

हिय के दरदों से ताने बुनकर

मैं महफिलों में गाता गुनगुनाता हूं।


हमको तुम्हारा इन्तज़ार है

कह दो तुम्हे भी इकरार है

मुझको अहसास है तुमको आभास है

तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है

Saturday, March 26, 2022

है उचित डाटा उपलब्ध नहीं (कश्मीर फाइल्स २)

आज देश में अजब गजब माहौल

बस चारों तरफ हो हल्ला है

कुर्सी यहां निठल्ला है


जब से आया है कश्मीर जैसा फाइल्स

रुत अवसर की आयी है

मजमा लगा है जलसा खिला है

जम रहे जमावड़े अवसरवादियों के

सबको यहां है अवसर दिखता

पर उन अभागों का दर्द न दिखता


चल रहे डिबेट पर डिबेट है

पर जिन पर ये डिबेट है

क्या उनको भी बेनफिट है?


जो बनने को जनता के जनार्दन

कुर्सी का मुख ताकते रहते हैं

हाथ वाले हो चाहे फूल वाले 

या साइकिल के चैन वाले

सबके मुख पर लगे थे ताले

जब घाटी में चल रहे थे भाले


जब भी खुलते है ये ताले

एक दूजे पर मढ़ते रहते दोष

ये हाथ वाले हो या फूल वाले


फिर मुख पर लग जाते ताले

जो हल पूछो निर्वासन का

कहते वह तो नरसंहार था

कहा से लाये हम वह डाटा

नहीं पास हमारे कोई उचित डाटा

कितने जारे कितने उजारे?

कितने मारे कितने काटे?

कितने नोंचे कितने खस़ोटे?

कितने लूटे कितने टूटे?

है उचित डाटा उपलब्ध नहीं

अरे बाटा की सन्तानों

खुद को उनकी स्थान पर रख के सोचों

उन अभागों का भाग गर होता तुम्हारे भाग

किस मुख  से कैसे तुम सुनते 

है उचित डाटा उपलब्ध नहीं?


नयनों के सपने नयनों में रह गये

नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये
बादल से रह गये धरती को तरसते
बरसा बनकर नयन भी बरस गये

नयनों की भाषा नयन ही जाने
निरखत रहे काहे जाने अनजाने
नयन तब भी न माने अब भी न माने
तकियों के सिराहने सिसकियों के तराने
गाते न गाते बीते कितने जमाने
सनम के बहाने सनम के बहाने

प्रेम की भाषा प्रेम की परिभाषा-२
व्याकरण समझ न सके अधूरी अभिलाषा
हिज्र के दिन ही संग मेरे रह गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये 
नयनों के सपने नयनों में रह गये

मेरे सारे गीत अब तेरे नाम हो गये
रास जो रचाये थे गीतों में बस गये
नयनों के गुनाह अब गीतो में रच गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये

जिस यौवन को मन ने छूआ
तन से छूना उनको वर्जित हैं
राधा श्याम सी अपनी कहानी
सदियों से जानी पहचानी
यादों के नगमें गुनगुनाते रह गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये।


Thursday, March 24, 2022

दिल के कोने से रोने की आहट आती है

दिल के कोने से रोने की आहट आती है
सांझ सवेरे पिय से मिलने की चाहत आती है
मन में बसे उस प्यार का साथ तेरे संसार का
जनम जनम से विछड़े यार की आहट आती है।

ओ पहले पहल का मिलना हमारा
आयी कभी न घड़ी वो दुबारा
छुए बिन छुअन की ओ सिहरन हमारी
दबे पांव राहों में बसना तुम्हारा
थरथराते लबों की कहानी हमारी
 सुनाता रहा मैं गीतों के बहाने

मेरे गीतों में तेरे चित्रों की बनावट आती है
कागज कलम स्याही भी तेरे गीत गाते है
अधरों के अनबुझे प्यास की तरावट आती है
मन में बसे उन दूरियों की रुकावट आती है
दिल के कोने से रोने की आहट आती है
सांझ सवेरे पिय से मिलने की चाहत आती है 

नयनों का बहकना मटकना मचलना
राहों में तेरे मेरा आवारा सा बनना
वो व्हाटसप की चैंटिंग शूरू अपनी सैटिंग
नयनों में ही मिलना नयनों से विछड़ना
जन्मों सें तेरा भाग्य रेखाओं का बहाना
लकीरों में मेरे नगमों के बहाने तेरी कहानी सुनाना

सोते जगते आंखों में तेरे स्वप्न सजाते है
रात रात भर जागकर तकिये भीगोते है
दिल के कोने से रोने की आहट आती है
सांझ सवेरे पिय से मिलने की चाहत आती है।


Friday, March 18, 2022

हम उनसे मोहब्बत करके दिन‌ रात मरते हैं

इलू इलू इलू इलू इलू इलू

इलू इलू इलू इलू इलू इलू


हम उनसे मोहब्बत करके दिन‌रात मरते हैं

वो इलू इलू इलू इलू ही करते है

अरे इनकी इलू इलू

जो जेब को टटोलू

तो इलू इलू इलू इलू ही करता  हूं 


जब बोले इलू इलू  कासे ना लू  ना लू  बोलू

जो बोलू ना लू ना लू तो मुंहं भी फूलू फूलू


जो  मुंह भी फूलू फूलू अरे मुंह भी फूलू फूलू 

तो जेब न टटोलू  जो जेब न टटोलू

वो बोले इलू इलू


इलू इलू इलू इलू इलू इलू

इलू इलू इलू इलू इलू इलू


हम उनसे मोहब्बत करके दिन‌रात मरते हैं

वो इलू इलू इलू इलू ही करते है


जो मैं इ लू ना लू

तो आलू आलू आलू

आलू आलू आलू

आलू आलू आलू


अरे आलू आलू आलू  इ लू कैसे गटक लू

ना लू ना लू ना लू ना लू 

ना लू ना लू ना लू ना लू


अरे ना लू ना लू ना लू

ना लू  ना लू ना लू

फिर बोलू इलू इलू इलू इलू इलू

इलू इलू इलू इलू इलू इलू

इलू इलू इलू इलू इलू इलू


हम उनसे मोहब्बत करके दिन‌ रात मरते हैं

वो इलू इलू इलू इलू ही करते हैं

इलू इलू इलू इलू इलू इलू


जो कभी थोड़ी-थोड़ी पी लू

फिर इनको कैसे झेलू

इलू इलू इलू इलू इलू इलू

इलू इलू इलू इलू इलू इलू

Thursday, March 17, 2022

इस तरह होली मनाएंगे हम

गाएंगें न न गुनगुनाएंगे हम
 आएंगे और छा जाएंगे हम
बस निगाहों से ही डस जाएंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम

अब है इन गेसुओं की कसम
सह पायेंगे न अब तुम्हारे जुलम
जो धर लेंगें हम बाहों मे भर लेंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम

आज बाहें न हमसे छुड़ा पाओगे
इक बार जो इनमें कस जाओंगे
न छोड़ेंगे हम न छुड़ाएंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम


अब न कोई आना न कानी चलेगी
बस जवानी की अपनी रवानी चलेगी
सर से पांव तलक रंग लगाएंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम

आज नयी कहानी लिख जाएंगे हम
अधर पी जाएंगे हम जी जाएंगें हम
आज न दिन न रात देखेंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम

सबपे एक एक गीत लिखे हैं (कश्मीरियों का निर्वासन)

गीत लिखे हैं प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से  जितने मन को चाहा
सब पे एक एक गीत लिखे हैं।

इक दिन दर्द कश्मिरियों के 
मैं पी गया मैं जी गया
हार लिखे है जीत लिखे हैं
पाक लिखे हैं नापाक लिखे हैं
भाग लिखे हैं अभाग लिखे हैं
प्रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं

जितने मन से मेरा मन तुम
सुन लेते हो तुम गुन गुन
उस मन से तुम इस मन का भी
मन से दुख तुम लेना सुन

सैतालिस की गांधी की वो करतूत
जो खुद बनने को देवदूत
दर्द अपनों के जाके भूल
लिया उनको को भी कबूल
जो चुके थे विभाजन भी कबूल
जिनके भालों की नोंको ने
नब्बे में भी खेली खूनी होली
जिनके वहशी ख्वाबों ने
उन दरिंदों के खूनी पंजों ने
उन अभागे मां बहनों के
 सिंदुर उजारे थे
संग बदन भी उघारे थे
अरे नोंचे थे काटे थे
मारे थे चिल्लाये थे
हम पाक तू नापाक
है कश्मीर हमारे भाग
अरे भाग भाग रे कश्मीरी अभाग
ये कश्मीर हमारा है।

गीत लिखे हैं प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से  जितने मन को चाहा
सबपे एक एक गीत लिखे हैं।

थे जनता के जो जनार्दन जो
उन आर्तों का दर्द सुन न सके
अरे सुन न सके न गुन ही सके
गुन न सके न धुन ही सके
मेरे संग संग इस धुन को
तुम सब मिल मिल के गाओ
तन से गाओ मन से गाओ
अरे गाओ गाओ सबको सुनाओ
इतना गाओ इतना सुनाओ
अरे गाओ गाओ उन बहरों को भी सुनाओ
जिनके कानों के पर्दे
थे सैतालिस में सिले गये
अरे नब्बे में भी नहीं खुले
बाइस में भी कहते न थकते
जिनका जिनका निर्वासन
जो चढ़ गये भेंट उस नरसंहार
अरे उन मां बहनों के दर्दों का
हिसाब नहीं जबाब नहीं
उन दिन के अनुचित कृत्यों का
है उचित डाटा उपलब्ध नहीं
कितने जारे कितने उजारे
कितने मारे कितने उघारे
कितने काटे कितने नोंचे
है उचित डाटा उपलब्ध नहीं
है एक ही हल उस नर संहार का निर्वासन का
जब तक हल न हो वह निर्वासन
तुम सब बन्द करों निर्वाचन

गीत लिखे हैं प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से   जितने मन को चाहा
सबपे एक एक गीत लिखे हैं


मन से जितने मन को चाहा सबपे एक एक गीत लिखे हैं

गीत लिखे हैं प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से जितने मन को चाहा 
सबपे एक एक गीत लिखे हैं

अब सुनों कहानी तुम भी रानी
पहली रानी इक दीवानी
मैं दीवाना ओ दीवानी
अधरों के अधरों से मिलते
बढ़ चली थी अपनी कहानी
संग जाते थे हम भी मेले
मेले में थे कितने थे खेले 
पर मेले में हम थे अकेले

दिन को खेले रात को खेले
कैसे गजब के लगते थे मेले
अधरों के अधरों से मिलते
खिल जाते थे हम भी अकेले

गीत लिखे है प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे है गीत लिखे हैं
मन से   जितने मन को चाहा
सबपे एक एक गीत लिखे हैं

इन गीतों की इक इक कहानी
हर कहानी की इक इक रानी
अब दूजी की भी सुनों कहानी
नयनों के नयनों से मिलते मिलते
मिल गये थे अधरों के खिलते खिलते
खिल रही थी अपनी भी जवानी
 
खिल रहे थे दिल मिल रहे थे
घुल रहे थे मिल जुल रहे थे
गुडमार्निंग से गुडनाइट तक
ह्वाटसप पे ही दिल खुल रहे थे
इक दूजे के दिल खुलते खुलते
पर रह गये हम मिलते मिलते

जिन रिश्तों को मन से छूआ 
अधरों से छूना वर्जित है
राधा श्याम सी है ये कहानी
सदियों से जानी पहचानी
पर तन्हाई में हम अकेले
रचते रहते मन के मेले

गीत लिखे हैं प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से जितने मन को चाहा
सब पे एक एक गीत लिखे हैं।

Wednesday, March 16, 2022

जन जन का तारणहार बनके राम सा अवतार मेरा (राम गीत)

पितु वचन रक्षण, मातु हठ  में

 भटकत फिरत वन कानन में

तड़पते जन जन के मन में पनपने दो विश्वास मेरा

सिय तेरे बिन हिय न धड़के हिय सो तड़पे बारम्बार मेरा

जन-जन का तारणहार बनके राम सा अवतार मेरा।


स्वर्ण मृग सा कैसा ये हठ था

हठ हो जैसा पर ये छल था

था नहीं ये राम सा चित्कार मेरा 

जो तूने लखन को पठाया

भूल कैसी ये हुयी जो भूल कर संवाद मेरा

सिय तेरे बिन हिय न धड़के हिय सो तड़पे बारम्बार मेरा

 जन-जन का तारणहार बनके राम सा अवतार मेरा



दर-दर  ढूंढ़ा वन-वन भटका

गिरी कानन उपवन दारुण वन

जन-जन, कण-कण, तृण-तृण खग-खग

 मृग-मृग दिक्-दिक् भी परखा

जॅंह जॅंह मन मेरा देवे खटका

सागर तक को भी नहीं बख्शा

सागर फतह कर फतह हेतु सेतु निर्माण मेरा

सिय तेरे बिन हिय न धड़के हिय सो तड़पे बारम्बार मेरा

जन-जन का तारणहार बनके राम सा अवतार मेरा


मेघनाथ, कुम्भकरन, रावन वध

तव सम्भव प्यासे पथराये नयन को यह मधुमय

दुर्दिन बीते सुभ दिन आए, 

पर रघुकुल रिति का हठ

और मेरा राम सा सठ

जन-जन के बहकावे में फंस कर,अग्नि परिक्षा क्या अधिकार मेरा

सिय तेरे बिन हिय न धड़के हिय सो तड़पे बारम्बार मेरा

जन-जन का तारणहार बनके राम सा अवतार मेरा



अब न कोयल  कूकती है

ना ही पपीहे के ही स्वर 

 मेरे राम से कर्ण पटल पर गूंजते है

अब न सावन ना बसंत न दिवारी न ही होरी

और सावन के दिनों मैं राम सा सठ

याद कर अपना राम सा हठ

मैं उसी सावन में खुद को कोसता हूं

आज होरी के भी रंगों राम सा बदरंग हूं

इह जहां से उह जहां में त्याग कर संसार मेरा

सिय तेरे बिन हिय न धड़के हिय सो तड़पे बारम्बार मेरा

जन-जन का तारणहार बनके राम सा अवतार मेरा




Tuesday, March 15, 2022

हम भारतवासी हम भारतवासी

ना कश्मीरी ना बिहारी ना मद्रासी
हम भारत वासी हम भारत वासी 
हम भारत वासी
नब्बे की वह काल रात्रि नब्बे की वह काल रात्रि
हम कश्मीरी दुशाला ओढ़े थे
वो पाक से भाला लाए थे
पाक पाक चिल्लाते थे
वो पाक पाक क्या हम नापाक
रे भाग भाग कश्मीरी अभाग
कहां घुसी थी गांधी की लाठी
गांधी की लाठी।
 
थे कश्मीर के जो मूल निवासी
या कह लो उनको आदिवासी
थे दिल्ली में जो सुखराशी
क्या न थे वो भारतवासी
फिर क्यों हुये थे वे वनवासी
वे वन वासी वे वनवासी


अब तो छोड़ो मीर जाफरी
अब भी करते क्या लंदन की चाकरी
सत्य कहो कहा सोये थे
किस विलास में खोये थे
दिखे नहीं क्यों वे विकल निवासी
विकल निवासी
 
खेल खेल खूनी खंजर
भारत था नि:शस्त्र जहां
भारत भी निर्वस्त्र  वहां
बाप इह जहां काटा जा रहा
बेटी उह जहां उघारी जा रही
सोच सोच जब वह मंजर
मन भी है अब उघड़ गया
हे भारत वासी हे भारत वासी
 
तुम सब ही हो मगध की थाती
अबकी बारी दुश्मन की छाती
खून खून से करना लथपथ छाती
याद कराना उनकी नानी
उनकी नानी उनकी नानी

ना कश्मीरी ना बिहारी ना मद्रासी
हम भारत वासी हम भारत वासी
हम भारत वासी

  

बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे

कभी डेविट में फसते हैं कभी क्रेडिट में फसते हैं
कभी यारों में फसते हैं कभी हरियाली में फसते हैं
जरा यार-यारी से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे

इतना क्यों घबराते हो आओ राज बताता हूं
कामर्स को समझाता हूं एकांउट को भी लजाता हूं
जरा एकांउट से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे

होते खाते तीन है बजाते सबकी बीन है
व्यक्तिगत, वास्तविक ,व अवास्तविक
इन तीनों के तीन नखरे
जरा इनके नखरों से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे

व्यक्तिगत के भी है दो दो यार
इन दोनों से कर लो प्यार
प्राकृतिक हो या कृत्रिम व्यक्ति
इन दोनों से मेरी शक्ति
रीता, गीता या कोई संस्था
जरा इन पपीता से बचके 
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे

वास्तविक की है बात निराली
 रहती यहां हरदम हरियाली
जिस जिस को मुद्रा में जानों
उन सबको वास्तविक मानों
बिल्डिंग, फर्निचर, मशीनरी, प्लांट
जरा हरियाली से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे

आय हो या व्यय की बात
लाभ के दिन या हानि की रात
यहीं रही तीसरे की जात
मजदूरी, वेतन का भुगतान
डिस्काउंट कमीशन सीना तान जो करे इंटरेस्ट की बात
जरा डिस्काउंट इंटरेस्ट से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
 
अब अगले कविता में 
तीनों के तीन नखरों से नाज उठाउंगा
तब तक बच्चे तीनों से मेल बढ़ाओ तुम
अब एकांउट में डट के
बच्चे मेरे बच्चे मन के बड़े सच्चे
होते ये कामर्स के बच्चे।





ओ लेके माउंट बेटन प्लान

ओ लेके माउंट बेटन प्लान
भर के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरों के लंदन से आया था इक गोरा शैतान-२

खींचकर रेड क्लिफ सी रेड लाइन
भारत के कर दो दो पार्ट 
एक नापाक ना-पाक एक पाक पाक
जो नापाक वो तिरंगा संग भी नापाक
थे पाक जो एकरंगा संग ही पाक
पूरे कर नेहरू जिन्ना के अरमान

गोरों के लंदन से आया था कोई गोरा शैतान
ओ लेके मांउंट बेटन प्लान
भर के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरो के लंदन से आया था इक गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान

जो उसने था खींचा लाल लाइन सी पार्टीशन
काली काली खूनी दिन रतिया भी पोजीशन
जो उसने था खींचा लाल लाइन सी पार्टीशन
काली काली खूनी दिन रतिया भी पोजीशन, होए
देश का करके विभाजन कर खूनी होली की सिचुएशन

गोरों के लंदन से आया था इक गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान
भर के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरों के लंदन से आया था इक गोरा शैतान

सोचों वो कैसा होगा मंजर यारों
आओं जरा मेरे संग मिल के विचारों
सोचों वो कैसा होगा मंजर यारों
आओं जरा मेरे संग मिल के विचारों,  होए
पंडा मुल्ला भी बेकरार मार काट करने को तैयार
गोरों के लंदन से आया था कोई गोरा शैतान
ओ लेके मांउट बेटन प्लान
भर के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरों के लंदन से आया था इक गोरा शैतान

नयनों पे चढ़े हुए बदलों के चश्मे
चले दम भरते कहां करने करिश्मे
नयनों पे चढ़े हुए बदलों के चश्मे
चले दम भरते कहां करने करिश्मे, होए
 देके हाथों में हथियार कत्ल करवाने हजार
गोरों के लंदन से आया था कोई गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान
भर के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरों की नगरी से आया था इक गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान

अब हर कोई बमके जी कब आ धमके
नर नारी के प्राण भी अधर में थे लटके
अब हर कोई बमके जी कब आ धमके
नर नारी के प्राण भी अधर में थे लटके, होए
दिया था ऐसा मंतर मार मानवता भी गयी हार
गोरों के लंदन से आया था इक गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान

भर के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरों की लंदन से आया था इक गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान

 सुन सुन मंजर वो आह भर आयी रे
आयी आयी आयी देखो आंख भर आयी रे
सुन सुन मंजर वो आह भर आयी रे
आयी आयी आयी देखो आंख भर आयी रे , हाए 
जो गलियों में खेले संग कंचे सी गोली 
वो भी खेले संग खूनी  होली 

गोरों के लंदन से आया था इक गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान
भर  के अधरों में कुटिल मुस्कान
गोरों के लंदन से आया था कोई गोरा शैतान
ओ लेके माउंट बेटन प्लान



आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे

आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे  आगे हाथ लगाएंगे पीछे हाथ लगाएंगे इसी असमंजस में हम तो सालों साल बिताएंगे  पानी मुफ्त बांटेंगे बिजली मुफ्त ...