मुझको अहसास है, तुमको आभास है
तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है
तुमसे मिलने को अब भी तड़पती यहां
दिल के कोनो में अपनी दबी सांस है
हिय के कोनो में है अब भी इक कमरा यहां
जिसके ताको पे रखी है यादें तेरी
खिड़कियों के ही खुलते ही मुखड़ा तेरा
देख मैं भी सजता सवरता रहा
तेरी यादों के पलको के छांव में मैं
स्वयं को ही अक्सर लुटाता रहा
दिल की धड़कन भी प्रायः अनायास है
साथ अधरों की रहती अनबुझी प्यास है
मुझको अहसास है, तुमको आभास है
तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है
सांकलो के बिना दर खुला है यहां
दर पे दस्तक है देती तेरी हिचकियां
वो यौवन की मदमस्त अंगड़ाइयां
गम के तकियों तले मेरी सिसकियां
सिसकती यहां है तन्हाईयां
संग खेले है तेरी परछाईयां
लकरों में अपना लिखा भाग्य है
कोरे कागज तेरे नाम लिखना मेरे भाग्य है
मुझको अहसास है तुमको आभास है
तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है।
दिल के दरिया में बहते रहते हैं पत्ते तेरे नाम के
मैं पल उन्हें चुनता बिनता उलटता पलटता हूं
संग बिताए पलों में रमता धुनता हूं
अश्कों के कोरों से गीत गजले रचता हूं
हिय के दरदों से ताने बुनकर
मैं महफिलों में गाता गुनगुनाता हूं।
हमको तुम्हारा इन्तज़ार है
कह दो तुम्हे भी इकरार है
मुझको अहसास है तुमको आभास है
तेरा मेरा अधूरा उपन्यास है