ना कश्मीरी ना बिहारी ना मद्रासी
हम भारत वासी हम भारत वासी
हम भारत वासी
नब्बे की वह काल रात्रि नब्बे की वह काल रात्रि
हम कश्मीरी दुशाला ओढ़े थे
वो पाक से भाला लाए थे
पाक पाक चिल्लाते थे
वो पाक पाक क्या हम नापाक
रे भाग भाग कश्मीरी अभाग
कहां घुसी थी गांधी की लाठी
गांधी की लाठी।
थे कश्मीर के जो मूल निवासी
या कह लो उनको आदिवासी
थे दिल्ली में जो सुखराशी
क्या न थे वो भारतवासी
फिर क्यों हुये थे वे वनवासी
वे वन वासी वे वनवासी
अब तो छोड़ो मीर जाफरी
अब भी करते क्या लंदन की चाकरी
सत्य कहो कहा सोये थे
किस विलास में खोये थे
दिखे नहीं क्यों वे विकल निवासी
विकल निवासी
खेल खेल खूनी खंजर
भारत था नि:शस्त्र जहां
भारत भी निर्वस्त्र वहां
बाप इह जहां काटा जा रहा
बेटी उह जहां उघारी जा रही
सोच सोच जब वह मंजर
मन भी है अब उघड़ गया
हे भारत वासी हे भारत वासी
तुम सब ही हो मगध की थाती
अबकी बारी दुश्मन की छाती
खून खून से करना लथपथ छाती
याद कराना उनकी नानी
उनकी नानी उनकी नानी
ना कश्मीरी ना बिहारी ना मद्रासी
हम भारत वासी हम भारत वासी
हम भारत वासी
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