कभी यारों में फसते हैं कभी हरियाली में फसते हैं
जरा यार-यारी से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
इतना क्यों घबराते हो आओ राज बताता हूं
कामर्स को समझाता हूं एकांउट को भी लजाता हूं
जरा एकांउट से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
होते खाते तीन है बजाते सबकी बीन है
व्यक्तिगत, वास्तविक ,व अवास्तविक
इन तीनों के तीन नखरे
जरा इनके नखरों से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
व्यक्तिगत के भी है दो दो यार
इन दोनों से कर लो प्यार
प्राकृतिक हो या कृत्रिम व्यक्ति
इन दोनों से मेरी शक्ति
रीता, गीता या कोई संस्था
जरा इन पपीता से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
वास्तविक की है बात निराली
रहती यहां हरदम हरियाली
जिस जिस को मुद्रा में जानों
उन सबको वास्तविक मानों
बिल्डिंग, फर्निचर, मशीनरी, प्लांट
जरा हरियाली से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
आय हो या व्यय की बात
लाभ के दिन या हानि की रात
यहीं रही तीसरे की जात
मजदूरी, वेतन का भुगतान
डिस्काउंट कमीशन सीना तान जो करे इंटरेस्ट की बात
जरा डिस्काउंट इंटरेस्ट से बचके
बच्चे मेरे बच्चे कामर्स के बच्चे
अब अगले कविता में
तीनों के तीन नखरों से नाज उठाउंगा
तब तक बच्चे तीनों से मेल बढ़ाओ तुम
अब एकांउट में डट के
बच्चे मेरे बच्चे मन के बड़े सच्चे
होते ये कामर्स के बच्चे।
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