आएंगे और छा जाएंगे हम
बस निगाहों से ही डस जाएंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम
अब है इन गेसुओं की कसम
सह पायेंगे न अब तुम्हारे जुलम
जो धर लेंगें हम बाहों मे भर लेंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम
आज बाहें न हमसे छुड़ा पाओगे
इक बार जो इनमें कस जाओंगे
न छोड़ेंगे हम न छुड़ाएंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम
अब न कोई आना न कानी चलेगी
बस जवानी की अपनी रवानी चलेगी
सर से पांव तलक रंग लगाएंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम
आज नयी कहानी लिख जाएंगे हम
अधर पी जाएंगे हम जी जाएंगें हम
आज न दिन न रात देखेंगे हम
इस तरह होली मनाएंगे हम
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