रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से जितने मन को चाहा
सबपे एक एक गीत लिखे हैं
अब सुनों कहानी तुम भी रानी
पहली रानी इक दीवानी
मैं दीवाना ओ दीवानी
अधरों के अधरों से मिलते
बढ़ चली थी अपनी कहानी
संग जाते थे हम भी मेले
मेले में थे कितने थे खेले
पर मेले में हम थे अकेले
दिन को खेले रात को खेले
कैसे गजब के लगते थे मेले
अधरों के अधरों से मिलते
खिल जाते थे हम भी अकेले
गीत लिखे है प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे है गीत लिखे हैं
मन से जितने मन को चाहा
सबपे एक एक गीत लिखे हैं
इन गीतों की इक इक कहानी
हर कहानी की इक इक रानी
अब दूजी की भी सुनों कहानी
नयनों के नयनों से मिलते मिलते
मिल गये थे अधरों के खिलते खिलते
खिल रही थी अपनी भी जवानी
खिल रहे थे दिल मिल रहे थे
घुल रहे थे मिल जुल रहे थे
गुडमार्निंग से गुडनाइट तक
ह्वाटसप पे ही दिल खुल रहे थे
इक दूजे के दिल खुलते खुलते
पर रह गये हम मिलते मिलते
जिन रिश्तों को मन से छूआ
अधरों से छूना वर्जित है
राधा श्याम सी है ये कहानी
सदियों से जानी पहचानी
पर तन्हाई में हम अकेले
रचते रहते मन के मेले
गीत लिखे हैं प्रीत लिखे हैं
रीत लिखे हैं गीत लिखे हैं
मन से जितने मन को चाहा
सब पे एक एक गीत लिखे हैं।
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