बरसा बनकर नयन भी बरस गये
बादल से रह गये धरती को तरसते
बरसा बनकर नयन भी बरस गये
नयनों की भाषा नयन ही जाने
निरखत रहे काहे जाने अनजाने
नयन तब भी न माने अब भी न माने
तकियों के सिराहने सिसकियों के तराने
गाते न गाते बीते कितने जमाने
सनम के बहाने सनम के बहाने
प्रेम की भाषा प्रेम की परिभाषा-२
व्याकरण समझ न सके अधूरी अभिलाषा
हिज्र के दिन ही संग मेरे रह गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
मेरे सारे गीत अब तेरे नाम हो गये
रास जो रचाये थे गीतों में बस गये
नयनों के गुनाह अब गीतो में रच गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
जिस यौवन को मन ने छूआ
तन से छूना उनको वर्जित हैं
राधा श्याम सी अपनी कहानी
सदियों से जानी पहचानी
यादों के नगमें गुनगुनाते रह गये
नयनों के सपने नयनों में रह गये
बरसा बनकर नयन भी बरस गये।
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