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Saturday, March 26, 2022

है उचित डाटा उपलब्ध नहीं (कश्मीर फाइल्स २)

आज देश में अजब गजब माहौल

बस चारों तरफ हो हल्ला है

कुर्सी यहां निठल्ला है


जब से आया है कश्मीर जैसा फाइल्स

रुत अवसर की आयी है

मजमा लगा है जलसा खिला है

जम रहे जमावड़े अवसरवादियों के

सबको यहां है अवसर दिखता

पर उन अभागों का दर्द न दिखता


चल रहे डिबेट पर डिबेट है

पर जिन पर ये डिबेट है

क्या उनको भी बेनफिट है?


जो बनने को जनता के जनार्दन

कुर्सी का मुख ताकते रहते हैं

हाथ वाले हो चाहे फूल वाले 

या साइकिल के चैन वाले

सबके मुख पर लगे थे ताले

जब घाटी में चल रहे थे भाले


जब भी खुलते है ये ताले

एक दूजे पर मढ़ते रहते दोष

ये हाथ वाले हो या फूल वाले


फिर मुख पर लग जाते ताले

जो हल पूछो निर्वासन का

कहते वह तो नरसंहार था

कहा से लाये हम वह डाटा

नहीं पास हमारे कोई उचित डाटा

कितने जारे कितने उजारे?

कितने मारे कितने काटे?

कितने नोंचे कितने खस़ोटे?

कितने लूटे कितने टूटे?

है उचित डाटा उपलब्ध नहीं

अरे बाटा की सन्तानों

खुद को उनकी स्थान पर रख के सोचों

उन अभागों का भाग गर होता तुम्हारे भाग

किस मुख  से कैसे तुम सुनते 

है उचित डाटा उपलब्ध नहीं?


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