सांझ सवेरे पिय से मिलने की चाहत आती है
मन में बसे उस प्यार का साथ तेरे संसार का
जनम जनम से विछड़े यार की आहट आती है।
ओ पहले पहल का मिलना हमारा
आयी कभी न घड़ी वो दुबारा
छुए बिन छुअन की ओ सिहरन हमारी
दबे पांव राहों में बसना तुम्हारा
थरथराते लबों की कहानी हमारी
सुनाता रहा मैं गीतों के बहाने
मेरे गीतों में तेरे चित्रों की बनावट आती है
कागज कलम स्याही भी तेरे गीत गाते है
अधरों के अनबुझे प्यास की तरावट आती है
मन में बसे उन दूरियों की रुकावट आती है
दिल के कोने से रोने की आहट आती है
सांझ सवेरे पिय से मिलने की चाहत आती है
नयनों का बहकना मटकना मचलना
राहों में तेरे मेरा आवारा सा बनना
वो व्हाटसप की चैंटिंग शूरू अपनी सैटिंग
नयनों में ही मिलना नयनों से विछड़ना
जन्मों सें तेरा भाग्य रेखाओं का बहाना
लकीरों में मेरे नगमों के बहाने तेरी कहानी सुनाना
सोते जगते आंखों में तेरे स्वप्न सजाते है
रात रात भर जागकर तकिये भीगोते है
दिल के कोने से रोने की आहट आती है
सांझ सवेरे पिय से मिलने की चाहत आती है।
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